Monday, January 25, 2010

आनंदित मन गाये श्याम


१
कृष्ण नाम रस पा लिया, तन्मय है अविराम
भाए बस वह बात, जो, मिलवा देवे श्याम

२
आनंदित मन गाये श्याम
साँसों का रथ उसके नाम
करे कृपा वह रसिक मनोहर
बन जाते हैं सारे काम

३

बरस रही मुस्कान
श्याम मुख जगमग, दीप्त, मनोहर

धन्य हुए नर-नारी
देखा, श्याम लल्ला ने हंस कर


अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
नवम्बर १६, १९ और २०, २००५ को लिखी
जनवरी २५, २०१० को लोकार्पित

1 comment:

समय चक्र said...

बहुत सुन्दर रचना .. गणतंत्र दिवस की शुभकामनाओ के साथ ...