Thursday, May 19, 2011

मुक्ति का सहज भाव


चन्दन चन्दन मन के उपवन
है परम सखा, नन्द के नंदन

उजियारा बरसे प्रेम प्रवाह करे कल कल
है कृपा तिहारी, मन प्रसन्न होवे निश्छल

यह बंधन बोध परे
मुक्ति का सहज भाव
है एक सहारा परम
प्रभु की नाम नाव

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
जून १२, २००८ को लिखी
१९ मई २०११ को लोकार्पित        

1 comment:

Rakesh Kumar said...

एक सहारा परम
प्रभु की नाम नाव

एक भजन शायद गुरू नानकजी का है,याद
आता है
'नाम जपू नाम जपू नाम जपू बाबरे
घोर भव,नीर निधि,नाम निज नाव रे'
प्रभु के नाम का सहारा बहुत बड़ा आधार है जीवन का. श्रीमद्भगवद्गीता में 'जप यज्ञ' को ईश्वर की
विभूति ही बताया गया है.
आपके पावन सात्विक भावों को नमन.