
कान्हा मुख मुस्कान मधुर
मिश्री की ढेली
भाग रही राधा, कर कान्हा
बंशी ले ली
तान छेड़ कर बांधे
राधा को मनमोहन
तन्मयता ऐसी जागी
हो गई राधा मोहन
अशोक व्यास
१२ मई ०५ को लिखी पंक्तियाँ दिसंबर २८ ०९ को लोकार्पित
मिश्री की ढेली
भाग रही राधा, कर कान्हा
बंशी ले ली
तान छेड़ कर बांधे
राधा को मनमोहन
तन्मयता ऐसी जागी
हो गई राधा मोहन
अशोक व्यास
१२ मई ०५ को लिखी पंक्तियाँ दिसंबर २८ ०९ को लोकार्पित
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