Sunday, May 9, 2010

श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेव

कान्हा मन भाये
भाये मन कान्हा
प्रेम पवन आये
गाये मन कान्हा

जीवन सुन्दर स्वपन कृपा का
सत्य करे सुमिरन कान्हा का
तन मन सुध जाए
कान्हा मन भाये 

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
१३ सितम्बर २०१० को लिखी
९ मई २०१० को लोकार्पित

1 comment:

Prarthana gupta said...

chote-chote bhawoin mein kitni gahrayee hai, har koi ise nahin samajh sakta...aap use badi saralta se likh dete hain....