Friday, September 3, 2010

चेतना सींचे सुमिरन

 
बीज है
प्रकाशवृत्त

चेतना सींचे
सुमिरन

लहलहाए
आनंद
मौन टेकरी 
प्रेम पवन

बैठूं 
सुरभित
मधुर गंध बन
उड़ता जाऊं
बैठे बैठे

अशोक व्यास
न्यूयार्क, अमेरिका
 
२४ जनवरी १९९५ को लिखी
३ सितम्बर २०१० को लोकार्पित

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