Saturday, September 18, 2010

फिर बुला रहा है कान्हा



ऐसा लग रहा है
घर लौट आया है मन
फिर बुला रहा है कान्हा
दिखाई दे रहा वृन्दावन

फिर प्रेम पवन आई
फिर आस्था से आलोकित मन
फिर आनंद बरखा मुझमें
जाग्रत अंतस में श्रद्धा का सावन

अशोक व्यास
२४ जून २००७ को लिखी
१८ सितम्बर २०१० को लोकार्पित

2 comments:

Prarthana gupta said...

aapki kavita padkar vrindawan jane ka mann kar raha hai......

Anonymous said...

Ati Sunder....
Prabhu se prathna ki aap ka prabhu prem nitya badhta rahe..........