Thursday, September 9, 2010

अब क्या मांगूं श्याम से

परिपूरण परमात्मा
तेरे चरण निवास
अब क्या मांगूं श्याम से
पूरी हो गयी आस

सेवा सुन्दर व्रत मना
करता जा निष्काम
छोड़ जगत की चाकरी
गाये जा घनश्याम

चल जमुना के तीर पर
देह लपेटे धूल
जहां श्याम चरणन पड़े
वहीं मिलेगा मूल

अशोक व्यास
मंगलवार, १७ अप्रैल २००७ को लिखी
गुरुवार, ९ सितम्बर २०१० को लोकार्पित

1 comment:

वन्दना said...

जहां श्याम चरणन पड़े
वहीं मिलेगा मूल

सच कहा और सही कहा।