Thursday, June 24, 2010

जो कान्हा संग खेले निसदिन


आनंदामृत श्याम लुटाये
ग्वाल बाल को खूब खिलाये
जो कान्हा संग खेले निसदिन
उसकी महिमा कौन बताये


अशोक व्यास

१४ मार्च २००४ को लिखी पंक्तियाँ
२४ जून को लोकार्पित 

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