Friday, June 4, 2010

गोविन्द धाम

कर्म मर्म तुम
सत्य धर्म तुम

केशव प्यारे
नित्य सहारे

आया हूँ फिर
द्वार तुम्हारे

यदुकुल नंदन
सब दुःख भंजन
हर दम तुम से 
मिला रहे मन


अशोक व्यास
८ सितम्बर 2007 को लिखी ४ जून २०१० को लोकार्पित 

आनंद श्याम
मकरंद श्याम
चल सुमिरन पथ
गोविन्द धाम

वह प्रेम मधुर
रस दिव्य मधुर
वह कृपामयी
बहुरूप मधुर

गोपाल मनोहर गिरिधारी
 महिमा मोहन की है भारी 
गायें श्रद्धा से नर-नारी
नित यमुनाजी की बलिहारी

१० सितम्बर २००७ को लिखी
४ जून २०१० को लोकार्पित

प्रेम प्रभु का पूंजी अपनी सच्ची है
बाकी जो है, दुनियादारी कच्ची है

११ सितम्बर २००७ को लिखी
४ जून २०१० को लोकार्पित

1 comment:

रवि कान्त शर्मा said...

व्यास जी, आपकी कृष्ण-रस की भूख कभी न मिटने पाये....
शुभकामना सहित.......

चन्द्रमुखी चंचल चितचोरी, जय श्री राधा
सुघड़ सांवरा सूरत भोरी, जय श्री कृष्ण
श्यामा श्याम एक सी जोड़ी
श्री राधा कृष्णाय नमः ..