Thursday, January 20, 2011

विश्वास का उत्सव मनाना

 
 
टिमटिम करती बाती
श्याम है साथी
खुशियों की पगड़ी
धड़कन इतराती

बाहर फुलवारी
सपनो की बारी
दुनिया की धमचक
अपनी है सारी

बस इतना रहे ध्यान
कहते करुनानिधान

"उत्साह बढ़ाना
उपलब्धि पाना
अपने विश्वास का
उत्सव मनाना

पर खुदको 
बिखरने से बचाना
और अन्दर का रास्ता 
भूल मत जाना"
 
अशोक व्यास 
न्यूयार्क, अमेरिका
२ अप्रैल १९९८ को लिखी
२० जनवरी २०११ को lokarpit

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